Tuesday, October 27, 2026
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कोयला घोटाले में राजीव अग्रवाल से जुड़ी वाशरियों पर फिर सवाल

 

चंद्रपुर/नागपुर | विशेष रिपोर्ट

हिन्द कोल वॉश एंड ट्रेडिंग कंपनी, बिलासपुर से जुड़े कारोबारी राजीव अग्रवाल पर एक बार फिर कोयला घोटाले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कोयला कारोबार में अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए राजीव अग्रवाल ने अलग-अलग नामों से अनेकों कंपनियाँ खड़ी कीं, जिनमें कहीं वे स्वयं डायरेक्टर हैं तो कहीं उनके परिवार के सदस्य कागज़ों पर मालिक बने हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में प्रमुख रूप से
महावीर कोल वॉशरी,
पारस कोल वॉशरी,
हिन्द महा मिनरल कोल वॉशरी
शामिल हैं।
हिन्द महा मिनरल कोल वॉशरी पहले गुप्ता कोल वॉशरी के नाम से जानी जाती थी, जिसकी यूनिटें
उसगांव – सस्ती, जिला चंद्रपुर ; पिपलगांव, जिला यवतमाल में संचालित हैं।

पहले भी हुई थी कार्रवाई, पर नहीं बदला सिस्टम छत्तीसगढ़ में इन वॉशरियों पर दो साल पहले भी सरकारी कार्रवाई की गई थी, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद न तो कार्यप्रणाली में कोई सुधार हुआ और न ही कथित टैक्स चोरी व कोयला हेराफेरी पर लगाम लग सकी।

महामाया कोल वॉशरी पर रेड के बाद उठ रहे सवाल

10 दिसंबर को चंद्रपुर जिले की महामाया कोल वॉशरी पर हुई रेड के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। इसके ठीक चार दिन बाद, 14 दिसंबर को छत्तीसगढ़ स्टेट जीएसटी विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए संबंधित इकाइयों पर शिकंजा कसा।

इस कार्रवाई में 27 करोड़ 50 लाख रुपये सरेंडर किए जाने की जानकारी सामने आई, जिसने पूरे कोयला उद्योग और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी।

कार्रवाई के बाद भी सवाल कायम

हालांकि विभागीय कार्रवाई के बाद भी आरोप है कि
टैक्स चोरी ; कोयला हेराफेरी , फर्जी बिलिंग
जैसी गतिविधियों में कोई ठोस कमी नहीं आई है।

राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का दावा है कि बड़े राजनेताओं के आशीर्वाद के चलते यह पूरा सिस्टम बेखौफ होकर चलता रहा। साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि राजीव अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और विक्की जैन जैसे कारोबारी नेताओं के ब्लैक मनी को व्हाइट करने का जरिया बन रहे हैं क्या यह सवाल इर्द गिर्द घूम रहा है .

सिस्टम से खिलवाड़ या मिलीभगत?

लगातार हो रही कार्रवाइयों के बावजूद कथित अनियमितताओं का जारी रहना प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। क्या यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन है या फिर पूरे सिस्टम के साथ संगठित खिलवाड़—यह आने वाली जांचों में साफ हो सकेगा।

फिलहाल कोयला उद्योग से जुड़े इस बहु-राज्यीय नेटवर्क पर निगाहें टिकी हैं और सभी की नजर इस बात पर है कि आगे की जांच में कौन-कौन से बड़े नाम बेनकाब होते हैं।

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