घुग्घुस / चंद्रपुर
10 दिसंबर को सीबीआई द्वारा की गई ताबड़तोड़ रेड के बाद कोल माफिया और कोल वॉशरी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई के बावजूद कोल माफिया नेटवर्क अंदरखाने अब भी सक्रिय नजर आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार 17 दिसंबर को दोपहर करीब 2 बजे महामाया कोल वॉशरी के संचालक एवं कथित भागीदार विकी जैन अपनी “कोल एक्सपर्ट” टीम के साथ घुग्घुस (बेलसनी परिसर) पहुंचे। बताया जा रहा है कि सीबीआई की चल रही जांच को लेकर घुग्घुस स्थित वॉशरी कार्यालय में वहां कार्यरत अधिकारियों और संबंधित लोगों के साथ गहन विचार-मंथन किया गया।
इसके बाद शाम करीब 7 बजे विकी जैन अपनी टीम के साथ घुग्घुस से चंद्रपुर स्थित होटल एन.डी. पहुंचे, जहां एक बड़े कोल व्यापारी और वॉशरी संचालक के साथ बंद कमरे में बैठक होने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उठते हैं कई बड़े सवाल
क्या बिलासपुर के अग्रवाल समूह द्वारा संचालित कोल वॉशरीज वर्षों से मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रही हैं?
क्या इस पूरे नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
किन बड़े अधिकारियों की शह पर कथित तौर पर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया?
CBI की जांच के दायरे में ये कंपनियां
सूत्रों के अनुसार, हिंद एनर्जी से जुड़ी कई कंपनियों पर सीबीआई ने सबसे पहले शिकंजा कसा है, जिनमें प्रमुख रूप से—
हिंद महामिनरल्स बेनिफिशरी कोल वॉशरी, उसगांव, घुग्घुस, जिला चंद्रपुर
हिंद महामिनरल कोल वॉशरी, पिंपलगांव, जिला यवतमाल
क्लीन कोल एंटरप्राइजेस प्रा. लि., वॉशरी म्हातारदेवी, घुग्घुस
महामाया इन्फ्रा डेवलपर्स, कोल वॉशरी म्हातारदेवी, घुग्घुस
सूत्र बताते हैं कि इन कंपनियों के निदेशक मंडल में राजीव अग्रवाल सहित अन्य लोग और विकी जैन के नाम सामने आ रहे हैं। यदि सीबीआई निष्पक्ष और सघन जांच करती है, तो महाराष्ट्र की कोयला खदानों से जुड़े लगभग ₹13,000 करोड़ से अधिक के कथित घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।
10 दिसंबर की कार्रवाई के बाद से संबंधित कंपनियों द्वारा कागजी हेराफेरी शुरू किए जाने और अंदरूनी लेन-देन फिलहाल रोक दिए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि माफिया नेटवर्क जांच के दबाव में बैकफुट पर है।
अब देश पूछ रहा है—
👉 क्या सीबीआई इस कोल माफिया की पूरी चेन तोड़ पाएगी?
👉 जांच में किन नेताओं और अफसरों के नाम सामने आएंगे?
👉 क्या ₹13,000 करोड़ से अधिक के इस कथित घोटाले में दोषियों को सजा मिलेगी?
जांच जारी है, लेकिन इतना तय है कि कोयला घोटाले की आंच अब राज्य की सीमाएं पार कर दिल्ली तक पहुंचती नजर आ रही है।



