नागपुर/चंद्रपुर –
नागपुर विधान सभा अधिवेशन में जिस “जाधव प्रकरण” पर ब्रम्हपुरी के आमदार विजय वडेटटीवार व सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ आमदार व माजी मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने आवाज बुलंद की थी, उसी मामले को लेकर अब बड़ा संशोधन और असली हकीकत सामने आई है।
मामला ब्रह्मपुरी उपविभागीय पुलिस अधिकारी एसडीपीओ राकेश जाधव से जुड़ा एक खुला भ्रष्टाचार प्रकरण है, जिसकी फाइल महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक मुंबई कार्यालय में पिछले ३२ दिनों से दबाकर रखी गई है।
कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर अवैध कार्रवाई, फिर सौदा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसडीपीओ राकेश जाधव ने अपने अधिकृत कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर चिमूर तालुका, जिला चंद्रपुर में
👉 बिना टीपी (ट्रांजिट पास) के रेत तस्करी कर रहे एक हायवा ट्रक को पकड़ा,
लेकिन
👉 कानूनी कार्रवाई करने के बजाय ५० हजार रुपये की रिश्वत लेकर ट्रक छोड़ दिया।
यह पूरा कृत्य महाराष्ट्र पुलिस नियमावली, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और IPC के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
विधानसभा में क्यों गूंजी आवाज़?

इसी प्रकरण को लेकर नागपुर अधिवेशन में आमदार विजय वडेटटीवार व आमदार सुधीर मुनगंटीवार ने सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता द्वारा सवाल उठाए जाने से यह साफ हो गया कि
यह कोई सामान्य प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया संरक्षण है।
भ्रष्ट अधिकारी को बचाने उतरे सत्ताधारी आमदार
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिले के एक प्रभावशाली सत्ताधारी आमदार ने राकेश जाधव को बचाने के लिए खुला हस्तक्षेप किया।
सूत्रों के अनुसार, यह आमदार
👉 मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में मजबूत पकड़ रखता है,
👉 दोनंबर के काम करने वाले ठेकेदारों से कमीशन लेकर उनके बिल पास करवाने के लिए जाना जाता है, और उसी रसूख का इस्तेमाल कर जाधव की फाइल दबवाने की कोशिश की जा रही है।
डीजी कार्यालय में 32 दिन की चुप्पी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
❌ न एसडीपीओ राकेश जाधव को निलंबित किया गया
❌ न उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई
❌ न विभागीय चौकशी शुरू की गई
जबकि पूरी फाइल डीजी कार्यालय मुंबई में 32 दिनों से पड़ी है।
यही वजह है कि विधानसभा में उठी आवाज़ अब और तीखी हो गई है और डीजी रश्मि शुक्ला की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या वह स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ हैं,
या फिर राजनीतिक दबाव के आगे प्रशासन बेबस है?
यह सिर्फ एक अधिकारी नहीं, पूरा तंत्र कटघरे में
यह मामला अब
✔️ अवैध रेत तस्करी
✔️ रिश्वतखोरी
✔️ राजनीतिक संरक्षण
✔️ और प्रशासनिक मिलीभगत
का क्लासिक उदाहरण बन चुका है।
अब सवाल सीधे सरकार से है ।
🔴 SDPO राकेश जाधव पर कार्रवाई कब होगी?
🔴 उन्हें बचाने वाले सत्ताधारी आमदार की भूमिका की जांच कब होगी?
🔴 या फिर विधानसभा में उठी आवाज़ भी फाइलों के ढेर में दबा दी जाएगी?
महाराष्ट्र की जनता अब सिर्फ बयान नहीं, कानूनी कार्रवाई चाहती है।



