Saturday, April 18, 2026
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मोहदा में कन्वेयर बेल्ट में दबकर मजदूर की दर्दनाक मौत , खाण मालिक की लापरवाही उजागर

 

मृतक के परिजनों को ₹ 7 लाख 50 हजार भरपाई देने की सिरपुर पुलिस द्वारा मिली जानकारी

मौदा – घुग्गुस ( प्रतिनिधि )
यवतमाळ जिल्हे के वणी तहसील के मोहदा क्षेत्र में स्थित केबी.खान कंपनी के गिट्टी क्रेशर में 5 फरवरी की तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. क्रेशर में कार्यरत प्रकाश सूर्यभान बांदुरकार (उम्र 54, निवासी कुर्ली) की कन्वेयर बेल्ट में दबकर दर्दनाक मौत हो गई. इस हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश और सनसनी फैल गई है, वहीं गिट्टी क्रेशरों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोज़ की तरह प्रकाश बांदुरकार क्रेशर में ड्यूटी पर थे. तड़के के समय अचानक उनका हाथ चलते कन्वेयर बेल्ट में फंस गया, जिससे वे मशीन के भीतर खिंचते चले गए. जब तक अन्य मजदूर कुछ समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मौके पर ही उनकी मौत हो गई. घटना की खबर फैलते ही सुबह के समय क्रेशर परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए.
मृतक के परिजनों को जब हादसे की सूचना मिली तो वे घटनास्थल पर पहुंचे और फूट-फूटकर रो पड़े. परिजनों ने खाण मालिक से तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग को लेकर जोरदार आक्रोश व्यक्त किया.
कुछ समय के लिए माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. बाद में पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में मृतदेह को पोस्टमार्टम के लिए चंद्रपुर भेजा गया.
इस घटना ने मोहदा क्षेत्र में संचालित दर्जनों से उपर गिट्टी क्रेशरों की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार कर दी गयी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मोहदा में पहले भी इसी तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया जाता है. क्रेशर मालिक मोटा मुनाफा कमाने में लगे हैं, जबकि मजदूरों की जान की कीमत शून्य हो गई है.
स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि अधिकांश गिट्टी क्रेशरों में सुरक्षा उपकरणों का घोर अभाव है. न तो मजदूरों को सेफ्टी गार्ड, हेलमेट, दस्ताने या प्रशिक्षण दिया जाता है और न ही मशीनों पर आवश्यक सुरक्षा कवच लगाए जाते हैं. नियमों और कानूनों को खुलेआम ताक पर रखकर उत्पादन जारी है.प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है.
घटना के बाद क्षेत्र में रोष का माहौल है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता, तो आज एक परिवार का सहारा यूं असमय नहीं छिनता. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना है या फिर सिस्टम की लापरवाही से हुई एक और मजदूर की बलि?
फिलहाल शिरपूर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. लेकिन स्थानीय जनता की मांग है कि सिर्फ जांच से काम नहीं चलेगा. दोषी खाण मालिकों पर कड़ी कार्रवाई हो, मृतक के परिवार को उचित मुआवजा मिले और सभी गिट्टी क्रेशरों में सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए. वरना ऐसी “मौत की मशीनें” यूं ही गरीब मजदूरों की जान लेती रहेंगी. बहरहाल सभी स्टोन क्रेशर का सेफ्टी ऑडिट करना अनिवार्य हो गया है तबतक के लिए स्टोन क्रेशर को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग जोर पकड़ रही है ..

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