चंद्रपुर | विशेष रिपोर्ट
गोंडपिपरि–चंद्रपुर मार्ग पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार ( ५ जनवरी ) को पिकअप वाहन व सुरजागढ़ लोह खदान के बड़ी ट्राला गाड़ी की आमने सामने टक्कर हुई , पिकअप ड्राइवर की घटना स्थल पर मौत हो गयी , दूसरा गंभीर रूप से घायल है .
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन बढ़ती दुर्घटनाओं के लिए गोंडपिपरि पुलिस, चंद्रपुर ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ गडचिरोली–चंद्रपुर की घोर लापरवाही सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
बीते कुछ महीनों में इस मार्ग पर तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग, बिना नंबर प्लेट, बिना फिटनेस और बिना परमिट चल रहे भारी वाहनों के कारण दर्जनों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों को जान गंवानी पड़ी, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
कागजों में सख्ती, सड़कों पर अराजकता
जहां एक ओर आम नागरिकों को छोटे-छोटे नियमों पर चालान थमाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर हाइवा, डंपर और भारी मालवाहक वाहन खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं।
न तो गति सीमा का पालन हो रहा है, न ही वाहनों की तकनीकी जांच।
प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि: ट्रैफिक पुलिस की नाकेबंदी केवल दिखावे तक सीमित है
आरटीओ द्वारा फिटनेस और परमिट की नियमित जांच नहीं की जाती पुलिस प्रशासन दुर्घटना के बाद ही हरकत में आता है
दुर्घटना के बाद कुछ दिनों की सख्ती और फिर वही ढर्रा — यही इस मार्ग की हकीकत बन चुकी है।
जनता पूछ रही है सवाल
क्या प्रशासन किसी बड़े आंदोलन या और मौतों का इंतजार कर रहा है?
क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं, माफियाओं के लिए नहीं?
क्या दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की जिम्मेदारी तय होगी या फाइलें दबा दी जाएंगी?
तत्काल कार्रवाई की मांग ; नागरिकों की मांग है कि:
गोंडपिपरि–चंद्रपुर मार्ग पर स्थायी ट्रैफिक चेक पोस्ट लगाए जाएं ; ओवरलोड और बिना परमिट वाहनों पर कड़ी कार्रवाई हो
आरटीओ और ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए । अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मार्ग दुर्घटना जोन नहीं बल्कि मौत का रास्ता बन जाएगा जिससे आम राहगीर जान मुट्ठी में लेकर चलते रहेंगे और मामा लोग रिश्वत की वसूली में मस्त रहेंगे …



